शादी से एक रात पहले रमेश हलवाई के पचास किलो लड्डू गायब हो गए। कल सुबह बारात आनी थी, और शक था तीन लोगों पर: मोटू चाचा ("हमने तो सिर्फ़ चखे थे, बीस-पच्चीस!"), नींद में डूबा पप्पू, और ड्रामेबाज़ बैंड-मास्टर जी।
NEET की तैयारी कर रही तनु को असली सुराग मिला: दाँतों के निशान वाला एक आधा खाया लड्डू। "दाँत तो सबके होते हैं, बिटिया," हलवाई बोले। "हाँ," तनु ने कहा, "पर DNA सबका अलग होता है।"
आइए देखें तनु ने केस कैसे सुलझाया, और हर क़दम के पीछे की बायोलॉजी।
1. DNA आया कहाँ से?
जब आप कुछ खाते हैं, तो लार (saliva) के साथ आपके गाल की कुछ कोशिकाएँ (buccal epithelial cells) उस पर चिपक जाती हैं। हर कोशिका में एक केंद्रक (nucleus) होता है, और केंद्रक में होता है आपका DNA।

2. हर इंसान का DNA अलग क्यों?
किन्हीं भी दो इंसानों का लगभग 99.9% DNA एक जैसा होता है। सारा फ़र्क बचे हुए 0.1% में है, और वह भी लाखों base pairs है।
इस फ़र्क का एक हिस्सा repetitive DNA में होता है: छोटे-छोटे sequence जो बार-बार, एक के बाद एक दोहराए जाते हैं। इन जगहों पर दोहराव की संख्या हर इंसान में अलग होती है। इन्हें VNTR (Variable Number of Tandem Repeats) कहते हैं; आजकल फ़ॉरेंसिक लैब ज़्यादातर छोटे STR इस्तेमाल करती हैं।
99.9% एक जैसा + 0.1% अलग = अनोखा पैटर्न
दोहराव की संख्या हर इंसान में अलग
हर हिस्से की एक कॉपी माँ से और एक पिता से आती है, इसलिए यही पैटर्न पितृत्व परीक्षण (paternity test) में भी काम आता है।
3. PCR: DNA की फ़ोटोकॉपी मशीन
एक लड्डू पर DNA बहुत कम होता है, टेस्ट के लिए काफ़ी नहीं। PCR (Polymerase Chain Reaction) DNA के एक चुने हुए हिस्से की बार-बार कॉपी बनाकर यह समस्या हल करता है। हर cycle में तीन क़दम:
- Denaturation (लगभग 95 °C): गर्मी से DNA के दोनों strands अलग हो जाते हैं।
- Annealing (लगभग 50–60 °C): छोटे primers कॉपी होने वाले हिस्से के दोनों तरफ़ जुड़ जाते हैं।
- Extension (72 °C): Taq polymerase नए strands बनाता है।
Taq polymerase Thermus aquaticus नाम के बैक्टीरिया से आता है, जो गर्म पानी के झरनों में रहता है। इसीलिए यह एंज़ाइम हर cycle के 95 °C को झेल लेता है।
गणित: 30 cycles काफ़ी क्यों हैं
हर cycle में कॉपियाँ दोगुनी होती हैं, तो n cycles के बाद:
कॉपियाँ = N₀ × 2ⁿ
N₀ = शुरुआत की कॉपियाँ
एक कॉपी से 30 cycles के बाद:
2³⁰ = 1,07,37,41,824
सौ करोड़ से ज़्यादा कॉपियाँ
"इतने लड्डू तो मैंने ज़िंदगी भर में नहीं बनाए!" हलवाई बोले। असली लैब में हर cycle 100% सफल नहीं होता, इसलिए असली संख्या थोड़ी कम होती है, पर फिर भी बहुत बड़ी।
4. जेल इलेक्ट्रोफ़ोरेसिस: बारकोड पढ़ना
कॉपी हुए DNA के टुकड़े करके उन्हें जेली जैसे agarose gel के एक सिरे पर बने गड्ढों (wells) में डाला जाता है। बिजली चालू करते ही:
- DNA पर negative charge वाले phosphate groups होते हैं, इसलिए वह positive electrode (anode) की तरफ़ चलता है।
- जेल छलनी जैसा काम करता है: छोटे टुकड़े ज़्यादा दूर जाते हैं, बड़े टुकड़े wells के पास रह जाते हैं।
नतीजा: पट्टियों (bands) का एक पैटर्न, जो बारकोड जैसा दिखता है, और हर इंसान का बारकोड अलग होता है।
यही था ट्विस्ट: दो अलग बारकोड। लड्डू 1 मिला पप्पू से ("मैं नींद में चल रहा था!") और लड्डू 2 मिला मोटू चाचा से ("मैं तो बस क्वालिटी चेक कर रहा था!")।

NCERT वाला तरीका
Alec Jeffreys की बनाई classic विधि में VNTR probe इस्तेमाल होता है: DNA अलग करना → restriction enzymes से काटना → electrophoresis से अलग करना → nylon membrane पर transfer (Southern blotting) → labelled VNTR probe से hybridisation → autoradiography से पहचान। आजकल लैब इसमें PCR जोड़ देती हैं, ताकि बहुत छोटा सैंपल भी काफ़ी हो।
5. प्रैक्टिस सवाल
जवाब खोलने से पहले ख़ुद हल करके देखिए।
कक्षा 12
सिर्फ़ परिपक्व लाल रक्त कोशिकाओं के सैंपल से DNA फ़िंगरप्रिंटिंग क्यों नहीं हो सकती?
जवाब देखें
इंसान की परिपक्व RBC में **केंद्रक नहीं होता**, इसलिए उनमें nuclear DNA नहीं होता। इसके लिए श्वेत रक्त कोशिकाएँ इस्तेमाल होती हैं।NEET
Agarose gel electrophoresis में DNA के टुकड़े किस तरफ़ चलते हैं? (a) cathode (b) anode (c) जेल के बीच (d) चलते ही नहीं
जवाब देखें
**(b) anode.** Phosphate groups की वजह से DNA पर negative charge होता है, इसलिए वह positive electrode की तरफ़ चलता है।NEET
PCR में साधारण DNA polymerase की जगह Taq polymerase क्यों इस्तेमाल होता है?
जवाब देखें
यह गर्मी पसंद बैक्टीरिया *Thermus aquaticus* से आता है और **thermostable** है: हर cycle के 95 °C वाले क़दम में भी ख़राब नहीं होता, इसलिए इसे बार-बार डालना नहीं पड़ता।NEET / JEE
किसी सैंपल में शुरुआत में DNA के एक हिस्से की 5 कॉपियाँ हैं। हर बार पूरा दोगुना होना मानें, तो 10 PCR cycles के बाद कितनी कॉपियाँ होंगी?
जवाब देखें
5 × 2¹⁰ = 5 × 1,024 = **5,120 कॉपियाँ**।NEET / JEE
एक DNA अणु से कम से कम दस लाख कॉपियाँ पाने के लिए कम से कम कितनी cycles चाहिए?
जवाब देखें
2¹⁹ = 5,24,288 (काफ़ी नहीं) और 2²⁰ = 10,48,576। इसलिए **20 cycles**।NEET
DNA फ़िंगरप्रिंटिंग किसके अंतर पर आधारित है? (a) एंज़ाइम बनाने वाले genes (b) VNTR जैसा repetitive DNA (c) ribosomal RNA (d) chromosomes की संख्या
जवाब देखें
**(b)** Repetitive DNA (VNTR/STR) में दोहराव की संख्या हर इंसान में अलग होती है।6. वीडियो वाला क्विज़
अगर पप्पू का एक हमशक्ल जुड़वाँ (identical twin) होता, तो क्या यह DNA टेस्ट दोनों में फ़र्क कर पाता?
नहीं। Identical twins एक ही निषेचित अंडे से बनते हैं, इसलिए उनका DNA लगभग एक जैसा होता है, और सामान्य DNA फ़िंगरप्रिंट दोनों का एक ही बारकोड दिखाता है। पुलिस को दूसरे सबूत चाहिए होंगे, जैसे उँगलियों के निशान, जो identical twins में भी अलग होते हैं।
याद रखिए
- स्रोत: केंद्रक वाली कोई भी कोशिका (लार, त्वचा, WBC, बाल की जड़)। परिपक्व RBC में केंद्रक नहीं होता।
- आधार: 99.9% DNA एक जैसा; VNTR/STR में दोहराव की संख्या हर पैटर्न को अनोखा बनाती है।
- PCR: denature (लगभग 95 °C) → anneal (लगभग 55 °C) → extend (72 °C, Taq polymerase)। कॉपियाँ = N₀ × 2ⁿ; 30 cycles ≈ 10⁹।
- जेल इलेक्ट्रोफ़ोरेसिस: DNA negative है, इसलिए anode की तरफ़ चलता है; छोटे टुकड़े ज़्यादा दूर जाते हैं।
- Identical twins का DNA फ़िंगरप्रिंट एक जैसा होता है।
सिलेबस: NCERT कक्षा 12 जीव विज्ञान, वंशागति का आणविक आधार (DNA फ़िंगरप्रिंटिंग) और जैव प्रौद्योगिकी: सिद्धांत व प्रक्रम (PCR, जेल इलेक्ट्रोफ़ोरेसिस)।
